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Sunday, June 16, 2019

जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई

जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई,
एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़।
दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।
जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।
टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।
" ये जनरल टिकट है।अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।"
कह टीसी आगे चला गया।
पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।
सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे।
बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे।
लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे।
" साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।"
टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।
" सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।"
" आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पत्नी ने कहा।
" तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक की रसीद बना देता हूँ, दोनों बैठे रहो।"
" ये लो साब, रसीद रहने दो।दो सौ रुपये बढ़ाते हुए आदमी बोला।
" नहीं-नहीं रसीद दो बनानी ही पड़ेगी। ऊपर से आर्डर है।रसीद तो बनेगी ही।
चलो, जल्दी चार सौ निकालो।वरना स्टेशन आ रहा है, उतरकर जनरल बोगी में चले जाओ।"
इस बार कुछ डांटते हुए टीसी बोला।
आदमी ने चार सौ रुपए ऐसे दिए मानो अपना कलेजा निकालकर दे रहा हो।

दोनों पति-पत्नी उदास रुआंसे
ऐसे बैठे थे ,मानो नाती के पैदा होने पर नहीं उसके शोक  में जा रहे हो।
कैसे एडजस्ट करेंगे ये चार सौ रुपए?
क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा?
नहीं-नहीं।
आखिर में पति बोला- " सौ- डेढ़ सौ तो मैं ज्यादा लाया ही था। गुड्डो के घर पैदल ही चलेंगे। शाम को खाना नहीं खायेंगे। दो सौ तो एडजस्ट हो गए। और हाँ, आते वक्त पैसिंजर से आयेंगे। सौ रूपए बचेंगे। एक दिन जरूर ज्यादा लगेगा। सेठ भी चिल्लायेगा। मगर मुन्ने के लिए सब सह लूंगा।मगर फिर भी ये तो तीन सौ ही हुए।"
" ऐसा करते हैं, नाना-नानी की तरफ से जो हम सौ-सौ देनेवाले थे न, अब दोनों मिलकर सौ देंगे। हम अलग थोड़े ही हैं। हो गए न चार सौ एडजस्ट।"
पत्नी के कहा।
" मगर मुन्ने के कम करना....""
और पति की आँख छलक पड़ी।
" मन क्यूँ भारी करते हो जी। गुड्डो जब मुन्ना को लेकर घर आयेंगी; तब दो सौ ज्यादा दे देंगे। "
कहते हुए उसकी आँख भी छलक उठी।
फिर आँख पोंछते हुए बोली-
" अगर मुझे कहीं मोदीजी मिले तो कहूंगी-"
इतने पैसों की बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय, इतने पैसों से हर ट्रेन में चार-चार जनरल बोगी लगा दो, जिससे न तो हम जैसों को टिकट होते हुए भी जलील होना पड़े और ना ही हमारे मुन्ने के सौ रुपये कम हो।"
उसकी आँख फिर छलक पड़ी।
" अरी पगली, हम गरीब आदमी हैं, हमें वोट देने का तो अधिकार है, पर सलाह देने का नहीं। रो मत।

(विनम्र प्रार्थना है जो भी इस कहानी को पढ़ चूका है उसे इस घटना से शायद ही इत्तिफ़ाक़ हो पर अगर ये कहानी शेयर करे ,कॉपी पेस्ट करे ,पर रुकने न दे शायद रेल मंत्रालय जनरल बोगी की भी परिस्थितियों को समझ सके। उसमे सफर करने वाला एक गरीब तबका है जिसका शोषण चिर कालीन से होता आया है।)

Thursday, January 17, 2019

Tazurba bata raha hun dost dard gum dar jo bhi hai bas tere ander hai

*तज़ुर्बा बता रहा हूँ दोस्त, दर्द, ग़म, डर जो भी है बस तेरे अंदर है !*_
_*खुद के बनाए पिंजरे से निकल के देख, तू भी एक सिकंदर है.....*

Wednesday, January 2, 2019

Ek sujhao 35 rs recharge

#एक_सुझाव
एयरटेल और आईडिया प्रति महीने 35 ₹ का  recharge न कराने पर सिम बन्द करने की धमकी दे रही है, इसका इलाज ये है कि आप सब थोड़ा सा कष्ट करके सिम को BSNL में पोर्ट कराइये, न कभी नम्बर बन्द होगा, न इनकमिंग, नेटवर्क भी हर जगह ओर कोई रोमिंग नही लगेगी, आपका नम्बर भी हमेशा सुरक्षित रहेगा, नेट और कालिंग के लिए तो सबके पास jio है ही ... सरकारी कम्पनी का भी भला होगा ,प्राइवेट कम्पनियों की धमकाने की हिम्मत नई होगी .. #you_can_share 👍

Tuesday, November 13, 2018

पापा देखो मेंहदी वाली - Heart Touching

पापा देखो मेंहदी वाली
   ••••••••••••••••••

मुझे मेंहदी लगवानी है
"पाँच साल की बेटी बाज़ार में
बैठी मेंहदी वाली को देखते ही
मचल गयी...
" कैसे लगाती हो मेंहदी "
पापा नें सवाल किया...
" एक हाथ के पचास दो के सौ ...?
मेंहदी वाली ने जवाब दिया......
पापा को मालूम नहीं था मेंहदी
लगवाना इतना मँहगा हो गया है.....
"नहीं भई एक हाथ के बीस लो
वरना हमें नहीं लगवानी."
यह सुनकर बेटी नें मुँह फुला लिया....
"अरे अब चलो भी ,
नहीं लगवानी इतनी मँहगी मेंहदी"
पापा के माथे पर लकीरें उभर आयीं ....
"अरे लगवाने दो ना साहब..
अभी आपके घर में है तो
आपसे लाड़ भी कर सकती है...
कल को पराये घर चली गयी तो
पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. ...
तब आप भी तरसोगे बिटिया की
फरमाइश पूरी करने को...
मेंहदी वाली के शब्द थे तो चुभने
वाले पर उन्हें सुनकर पापा को
अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी....
जिसकी शादी उसने तीन साल पहले 
एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी......
उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी
छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था.....
दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के
रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर
उनका पेट बढ़ता ही चला गया ....
और अंत में एक दिन सीढियों से
गिर कर बेटी की मौत की खबर 
ही मायके पहुँची....
आज वह छटपटाता है 
कि उसकी वह बेटी फिर से 
उसके पास लौट आये..? 
और वह चुन चुन कर उसकी 
सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे...
पर वह अच्छी तरह जानता है 
कि अब यह असंभव है.
" लगा दूँ बाबूजी...?, 
एक हाथ में ही सही "
मेंहदी वाली की आवाज से 
पापा की तंद्रा टूटी...
"हाँ हाँ लगा दो. 
एक हाथ में नहीं दोनों हाथों में. ....
और हाँ, इससे भी अच्छी वाली हो
तो वो लगाना.....
पापा ने डबडबायी आँखें 
पोंछते हुए कहा 
और बिटिया को आगे कर दिया......
जब तक बेटी हमारे घर है 
उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करे,...
क्या पता आगे कोई इच्छा 
पूरी हो पाये या ना हो पाये ।
ये बेटियां भी कितनी अजीब होती हैं 
जब ससुराल में होती हैं 
तब माइके जाने को तरसती हैं....
सोचती हैं 
कि घर जाकर माँ को ये बताऊँगी 
पापा से ये मांगूंगी 
बहिन से ये कहूँगी
भाई को सबक सिखाऊंगी
और मौज मस्ती करुँगी...
लेकिन
जब सच में मायके जाती हैं तो
एकदम शांत हो जाती है
किसी से कुछ भी नहीं बोलती....
बस माँ बाप भाई बहन से गले मिलती है। 
बहुत बहुत खुश होती है।
भूल जाती है 
कुछ पल के लिए पति ससुराल.....
क्योंकि 
एक अनोखा प्यार होता है मायके में
एक अजीब कशिश होती है मायके में.....
ससुराल में कितना भी प्यार मिले.....
माँ बाप की एक मुस्कान को
तरसती है ये बेटियां....
ससुराल में कितना भी रोएँ
पर मायके में एक भी आंसूं नहीं
बहाती ये बेटियां....
क्योंकि
बेटियों का सिर्फ एक ही आंसू माँ
बाप भाई बहन को हिला देता है
रुला देता है.....
कितनी अजीब है ये बेटियां
कितनी नटखट है ये बेटियां
भगवान की अनमोल देंन हैं 
ये बेटियां ......
हो सके तो
बेटियों को बहुत प्यार दें
उन्हें कभी भी न रुलाये
क्योंकि ये अनमोल बेटी दो
परिवार जोड़ती है
दो रिश्तों को साथ लाती है।
अपने प्यार और मुस्कान से।
हम चाहते हैं कि
सभी बेटियां खुश रहें 
हमेशा भले ही हो वो
मायके में या ससुराल में।
●●●●●●●●
खुशकिस्मत है वो जो बेटी के बाप हैं, उन्हें भरपूर प्यार दे, दुलार करें और यही व्यवहार अपनी पत्नी के साथ भी करें क्यों की वो भी किसी की बेटी है और अपने पिता की छोड़ कर आपके साथ पूरी ज़िन्दगी बीताने आयी है।  उसके पिता की सारी उम्मीदें सिर्फ और सिर्फ आप से हैं।
........ ✍✍✍✍

Ek Bache Ko Aam Ka Ped Bahut Pasand Tha - Heart touching

एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था। 
जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता। 
पेड के उपर चढ़ता,
आम खाता,
खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता। 
उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।
बच्चा जैसे जैसे बडा होता गया वैसे वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया। 
कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।
आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता। एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा, 
"तु कहां चला गया था? मै रोज़ तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"
बच्चे ने आम के पेड से कहा, 
"अब मेरी खेलने की उम्र नही है। 
मुझे पढना है, 
लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"
पेड ने कहा, 
"तु मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे, 
इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"
उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया। 
उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया। 
आम का पेड उसकी राह देखता रहता।
एक दिन वो फिर आया और कहने लगा, 
"अब मुझे नौकरी मिल गई है, 
मेरी शादी हो चुकी है, 
मुझे मेरा अपना घर बनाना है इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"
आम के पेड ने कहा, 
" तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा, 
उससे अपना घर बना ले।" 
उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।
आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था 
वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।
कोई उसे देखता भी नहीं था। 
पेड ने भी अब वो बालक / जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।
फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा, 
"शायद आपने मुझे नही पहचाना, 
मै वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"
आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा, 
"पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"
वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा, 
"आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है, 
आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"
इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।
वो आम का पेड़ हमारे माता-पिता हैं।
जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था। 
जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये। 
पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी, 
कोई समस्या खडी हुई।
आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।
जाकर उनसे लिपटे,उनके गले लग जाये फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।🙏🏼🙏🏼

Wednesday, March 7, 2018

Humesha bazar me choti dukan se hi kharidari kare

हमेशा बाजार में छोटी दुकान से ही खरीदारी करें
क्योंकि यह अमीर बनने के लिए नहीं दो वक्त की रोटी के लिए काम करते हैं।
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Hindu New Year - Happy New Year

बेटा :- पापा ये नया साल २ बार क्यों आता है.??
पिता :- नहीं बेटा..
नया साल तो एक बार ही आता है ।
साल में 1 जनवरी को...
बेटा :- नही पापा..
एक भैया घर पर आकर
एक झंडा दे गए हैं
केसरिया🚩रंग का..
और बोले इसको नए साल के दिन सुबह अपने घर की छत पर लगाना...।
पिता :- ओह हो बेटा..
वो RSS संघ शाखा वाले होंगे..
वो ये
"हिन्दु वाला"
नया साल मनाते है...
बेटा आश्चर्य से पिता की ऒर देखकर जो कहता है
वो शायद हमारी आँखे खोल दे.??
"पापा इसका मतलब क्या हम हिन्दु नहीं है".??
क्या हम अपनी दिवाली, दशहरा, होली, राखी, तीज, गणगौर नहीं मनाते.??
तो फिर हम अपना नया साल सिर्फ अंग्रेजों वाला  ही क्यों मनाये.??
क्युँ नही हम पहले अपना "सनातन हिन्दु नव वर्ष" मनाये.??
पिता :- कुछ सोचकर..
बेटा तेरी बात तो एकदम सही है..
ठीक है
जा बेटा लगा दे
अपना केसरिया भगवा झंडा 🚩 घर के ऊपर और
तेरी माँ से कह दे की
हमारे हिन्दु नव वर्ष पर खीर पुड़ी भी बना लेवे..
भई हम हिन्दुओं का अपना तो यही नया साल है ;
कुछ मीठा भी तो होना ही चाहिये
विदेशी नववर्ष पे कैसा हर्ष,
आओ मनाये भारतीय नववर्ष🚩🇮🇳
हिन्दू नववर्ष ,
विक्रम संवत
२०७५ (2075 ) ,   

  18 मार्च 2018

🚩 जय जय श्री राम 🚩

ॐ चेत्र शुक्ल एकम, राजा विक्रम नव संवत 2075, आरोग्य धन्वतरि विद्या दिवस, बसन्त नवरात्र आरम्भ 18 मार्च , गुड़ी पड़वा . 🚩 , 🙏वन्दे मातरम🚩जय हिंद 🇮🇳💐

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