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Saturday, July 23, 2016

Joo bhi dukh yaad na tha..

जो भी दुख याद न था..
जो भी दुख याद न था याद आया;
आज क्या जानिए क्या याद आया;
याद आया था बिछड़ना तेरा;
फिर नहीं याद कि क्या याद आया;
हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया;
जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया;
जिस तरह धुंध में लिपटे हुए फूल;
इक इक नक़्श तेरा याद आया;
ये मोहब्बत भी है क्या रोग 'फ़राज़';
जिसको भूले वो सदा याद आया।
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