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Friday, June 17, 2016

Rajputo ki aysi khani hai

राजपूतों की ऐसी कहानी है , 
कि राजपूत ही राजपूत कि निशानी है l
हम जब आये तो तुमको एहसास था , 

कि कोई एक शेर मेरे पास था ll
हम गरम खून के उबाल हैं , 

प्यासी नदियों की चाल हैं , l
हमारी गर्जना विन्ध्य पर्वतों से टकराती है 

\और हिमालय की चोटी तक जाती है ll
हम थक कर बैठेने वाले रड बांकुर नहीं ठाकुर हैं .... l
गर्व है हमें जिस माँ के पूत हैं , 

जीतो क्यूंकि हम राजपूत हैं ll
हम मृतयु वरन करने वाले जब जब हथियार उठाते हैं l
तब पानी से नहीं शोनीत से अपनी प्यास बुझाते हैं ll
हम राजपूत वीरो का जब सोया अभिमान जगता हैं l
तब काल भी चरणों पे प्राणों की भीख मांगता हैं ll
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